- Rajesh sharma
संघर्षपूर्ण और प्रतिबद्ध यात्रा
विशेष संपादकीय
बांधवभूमि, न्यूज
मध्यप्रदेश
उमरिया
दैनिक बांधवभूमि 17 वर्षों की सतत, संघर्षपूर्ण और प्रतिबद्ध यात्रा पूरी कर आज 18वें वर्ष मे प्रवेश कर रहा है। 01 मई 2009 को हमारे पितृ पुरुष स्व. पं. अर्जुनदास शर्मा ने इसकी नींव रखी थी। यह केवल एक समाचार पत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि सत्य के साथ खड़े होने, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखने का संकल्प था। स्थापना के अगले ही वर्ष संस्थापक यह दायित्व सौंपकर अनंत यात्रा पर निकल पड़े। वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके विचार, निर्भीकता और जनसेवा का भाव आज भी अखबार की हर पंक्ति मे जीवित है। बांधवभूमि ने केवल खबरों का माध्यम बनने की बजाय समाज की नब्ज और जनभावनाओं का सशक्त प्रतिविंब बनने का कार्य किया है। इन वर्षों मे अनेक चुनौतियां आईं। दबाव, अभाव और कठिन परिस्थितियों ने धैर्य की परीक्षा ली, फिर भी हमने हर स्थिति मे न्याय का साथ चुना। सत्ता से ज्वलंत प्रश्न पूछे और समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को मजबूती से उठाया।
यह बदलाव का दौर है। वर्तमान नस्ल ने अपने जीवनकाल मे जितने परिवर्तन देखे हैं, उतने शायद ही किसी अन्य पीढ़ी ने अनुभव किए हों। गत्ते की रेल टिकट, तीन फिट का ट्रांजिस्टर, एंटीना वाली टीवी, कैसेट, वीसीआर, भाप के इंजन और बैलगाड़ी के बीच अपना बचपन गुजारने वाली संतति अब नैनो टेक्नॉलाजी का उपयोग भी कर रही है। आज के मोबाइल, कैशलेस लेनदेन, व्हाट्सएप और इंटरनेट जैसे आधुनिक साधनो ने जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। विकास और तकनीकी ने निश्चित ही नए आयाम स्थापित हुए हैं, लेकिन इसी दौरान सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र मे कई नकारात्मक परिवर्तन भी सामने आए हैं। विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका हो या फिर पत्रकारिता, नैतिक पतन के असर से कोई भी स्तंभ अछूता नहीं रहा।
एक समय था जब सच बोलना और सुनना साहस का प्रतीक माना जाता था, लेकिन आज यह अप्रिय स्थिति का कारक है। जिसकी वजह से अधिकांश बुद्धिजीवी और गणमान्य संस्थायें या तो कर्णप्रिय वाक्यों मे गुजारा करती हैं, या मौन का मार्ग चुन लेती हैं। ऐसे हालात मे भी पत्र ने असत्य और अन्याय के विरूद्ध लड़ाई निरंतर जारी रखी है, जिसका प्रतिफल हमे पाठकों के विश्वास एवं प्रेम के रूप मे प्राप्त हुआ है।
हमारा उद्देश्य लोगों द्वारा प्रेषित तथा समाज मे व्याप्त समस्यायों का केवल प्रमुखता से प्रकाशन ही नहीं बल्कि उनका ठोस समाधान हैं। यही कारण है कि बांधवभूमि आज एक ऐसी संस्था के रूप मे स्थापित हो सका है, जिस पर प्रत्येक वंचित और शोषित व्यक्ति भरोसा करता है।
स्थापना दिवस के अवसर पर इस अमूल्य विश्वास को बनाये रखने की प्रतिज्ञा के सांथ सभी पाठकों के प्रति कोटिश: आभार, धन्यवाद। जय हिंद।