राज्य
10-Oct-2026
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- Rajesh sharma



अब सुनाई नहीं देगी डॉटी की दहाड़

बांधवगढ़ की मशहूर बाघिन की मौत, उद्यान का कुनबा बढ़ाने मे रहा महत्वपूर्ण योगदान

बांधवभूमि, न्यूज 

मध्यप्रदेश
उमरिया।
जिले के बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान की मशहूर बाघिन डॉटी नहीं रही। गत दिवस बीटीआर अंतर्गत मानपुर बफर के मजखेता बीट मे हाथी से गश्त के दौरान उसका शव पाया गया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उनके निर्देश पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक एसओपी का पालन करते हुए क्षेत्र की घेराबंदी की गई। शाम को डॉग स्क्वाड ने मृत बाघिन तथा आसपास के इलाके की सघन जांच की, जिसमे कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। पोस्टमार्टम सहित सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शनिवार को डॉटी का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय सहित विभागीय अधिकारी, चिकित्सक और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि डॉटी के लगभग 15-16 माह के दो शावक भी हैं, जिन्हें अलग होकर विचरण करते देखा गया है। वन अमला इन पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।

पर्यटकों के बीच थी लोकप्रिय
बीते कुछ वर्षों मे अपने रुतबे और खास अंदाज के कारण डॉटी बांधवगढ़ के नामचीन बाघों मे शुमार हो गई थी। देशी और विदेशी सैलानियों के बीच वह अत्यंत लोकप्रिय थी। प्रसिद्ध पटिहा मादा और ब्लू आई नर की संतान डॉटी का जन्म 2011-12 मे हुआ था। लगभग 14 वर्ष की उम्र मे उसने तीन से चार बार प्रसव किया। इस दौरान कई शावकों को जन्म देने के साथ उनका पालन-पोषण कर आत्मनिर्भर बनाया। बांधवगढ़ मे बाघों का कुनबा बढ़ाने मे उसका उल्लेखनीय योगदान रहा।

बेटी से मिली क्षेत्रीय वर्चस्व की चुनौती
एक समय ऐसा आया, जब डॉटी को अपनी ही बेटी से क्षेत्रीय वर्चस्व की चुनौती मिलने लगी। अंतत: उसे अपना इलाका छोड़ना पड़ा। इसके बाद उसने ताला जोन को नया ठिकाना बनाया, जहां भी उसने दो शावकों को जन्म दिया। बीटीआर के अधिकारियों, बाघ संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों तथा वन्यजीव प्रेमियों ने डॉटी की मौत पर गहरा दुख जताया है। उनका कहना है कि अपने गौरवशाली जीवन और बांधवगढ़ मे बाघों के संवर्धन मे योगदान के लिए उसे हमेशा याद रखा जाएगा। क्षेत्र मे भले ही अब उसकी दहाड़ सुनाई न दे, लेकिन उसका विशाल परिवार इस विरासत को आगे बढ़ाता रहेगा।